Shodh International: A Multidisciplinary International Journal (ISSN: 2581-3501)
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<p>The aim of <strong>Shodh International [peer-reviewed journal]</strong> is to provide a high profile, open access, leading-edge international forum for authors and academic researchers working in the fields of science, technology, management, arts, medical, pharmacy and engineering to contribute, and to disseminate innovative and important new work in Hindi/Hinglish language. This journal specially aims to provide a platform to the authors who prefer publishing their articles in languages other than English (Hindi/Hinglish). The originality of the work is focused on. The journal focusses on a fast peer review process of submitted papers to ensure accuracy, the relevance of articles and originality of papers.</p>Eureka Journalsen-USShodh International: A Multidisciplinary International Journal (ISSN: 2581-3501)2581-3501उत्तर प्रदेश में मानव संसाधन विकास (फिरोजाबाद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के विशेष संदर्भ में)
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<p>मानव संसाधन विकास व्यक्ति को उनके प्रदर्शन, उनकी क्षमताओं को बढ़ाने, उनकी जरूरतों को पूरा करने और सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति को बढ़ाने में मदद करता है। प्रत्येक व्यक्ति में क्षमता जिसका उपयोग बेहतर उत्पादकता या सेवा के लिए किया जा सकता है, इस क्षमता को वास्तविकता में बदलने की प्रक्रिया स्थापित करने में सक्षम बनाना है। इस प्रक्रिया में मनुष्य लगातार ज्ञान और कौशल प्राप्त करने के लिए प्रेरित होता रहता है। वर्तमान अध्ययन फिरोजाबाद जनपद के विशेष संदर्भ में उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा मंडलके ग्रामीण क्षेत्रों में मानव संसाधनों के बारे में ज्ञान की वर्तमान स्थिति को समृद्ध करेगा। इससे उत्तर प्रदेश राज्य में मानव संसाधन की समस्याओं को समझने में मदद मिलेगी।</p>डॉ0 प्रमोद कुमार
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2025-04-142025-04-14101तुलसीदास के राम की प्रासंगिकता-आधुनिकता के संदर्भ में
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<p>तुलसीदास भक्तिकाल के सगुण भक्ति धारा के राम भक्ति शाखा के प्रख्यात कवि है। तुलसी ने रामचरितमानस के ज़रिए भगवान राम की भक्ति को घर-घर तक पहुँचाया है। लोक कल्याणकारी कथा के रूप में राम चरित्र-गाथा का बखान करने वाली यह रचना अपने रचनाकाल के 500 वर्षों के पश्चात् भी सतत् लोकप्रिय बनी हुई है निश्चय ही यह साधारण कवि की साधारण काव्य नहीं है। आधुनिक समाज में, महाभारत और रामायण जैसे पुराने महाकाव्यों की आधुनिक लोगों के कम्प्यूटरीकृत जीवन को बदलने के लिए असीमित प्रासंगिकता है। समाज अनेक वर्गो और वर्णो में विभाजित है। मानव-मानव के बीच विषमता शिखर पर पहुँच गयी है। समस्त भारत देश में इन दिनों भावनात्मक एकता की कमी महसूस की रही है जिसके कारण तुलसी के राम की प्रासंगिता और बढ़ गयी है। इस महान कवि ने राम राज की कल्पना द्वारा़ ’ना ही दरिद्र कोई दुखी ना दीना’ (उत्तरकाण्ड) का आदर्श प्रस्तुत किया गया। सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति का तुलसी के रामराज्य में गंभीर रचनात्मक आश्वासन है। आज पूरे विश्व में इस महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मानवसंघर्ष से तीव्र होता जा रहा है। राम कथा को आध्यात्मिक अर्थों में भी यदि हमारा आधुनिक मन ग्रहण न करे तो उसके साधारण अर्थ भी उतने ही श्रेष्ठ हैं। राम को विष्णु अवतार न मान कर यदि उन्हे एक साधारण मानव के रूप में स्वीकृत कर इस पूरी कथा के निहितार्थ आज के समय में अभी भी प्रासंगिक माने जा सकते हैं।</p>डॉ. एन. लावण्या
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