ग्रामीण भारत का नया चेहरा
Abstract
ग्बोलाइजेशन के दौर बदलते भारत के स्वरूप ग्रामीण भारत को भी अपने रंग में रगना शुरू कर दिया है । इंटरनेट के आने के बाद तो संचार क्रांति ने तो बदलाव की गति को और भी तीव्र कर दिया है। अपनी पारंपरिक शिक्षा पद्धति के पुराने ढांचे को तोडकर अब ग्रामीण शिक्षा ने एक नई अंगडाई ली। गांवों में बसने वाला भारत अब ई-क्रांति का अग्र दूत बनने की राह पर है। डिजिटलाईजेशन के इस दौर में भारत सरकार ने भी शिक्षा-व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटलाइज्ड करने की योजना बनाई है। (Patel, 2019)और इसके अंतर्गत प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक की पूरी शिक्षा व्यवस्था को भी अपने पारंपरिक दौर से निकालकर डिजिटल किया जा रहा है। इसके लिए सरकार कई तरह की योजनाओं को क्रियांवित कर रही है। किंतु वर्तमान समय में भारत की ग्रामीण शिक्षा के लिए कई ऐसे मुद्दे हैं जैसे संसाधनों की कमी, प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, लैंगिक असमानता, छात्रों का स्कूलों के प्रति कम रुझान, बीच में ही स्कूल छोडना, जिनकी वजह से ग्रामीण शिक्षा के Re-imagining में तमाम मुश्किलें अभी भी हैं। इन तमाम मुश्किलों के बीच ई-लर्निंग एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत ग्रामीण शिक्षा के मध्य इस गेप को कम किया जा सकता है। ई-लर्निंग को सीधे तौर पर कहा जाए तो “तकनीकी माध्यम से प्रभावकारी शिक्षा” और इस प्रभावकारी तकनीकी शिक्षा के माध्यम से ही ग्रामीण भारत के अंधेरे कोने को रोशन किया जा सकता है।