नाद से आनंद तक: भारतीय संगीत, पुरस्कार-तंत्रिका-विज्ञान और भारतीय ज्ञान प्रणाली के माध्यम से सुख, समृद्धि और मानव उत्कर्ष का नाद-न्यूरो चेतना मॉडल

Authors

  • डॉ. अजय कृष्ण तिवारी नाद-न्यूरो चेतना विज्ञान के संस्थापक एवं प्रवर्तक, मनोवैज्ञानिक | शिक्षाविद् | AI Creator | भारतीय ज्ञान प्रणालियों के शोधकर्ता।

Abstract

मानव कल्याण केवल रोगों की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं है। एक सार्थक और पूर्ण जीवन की पहचान सुख, भावनात्मक समृद्धि, मनोवैज्ञानिक लचीलापन, संज्ञानात्मक स्पष्टता तथा निरंतर आंतरिक संतुष्टि से होती है। किंतु इक्कीसवीं सदी में तीव्र तकनीकी विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अतिउत्तेजना, निरंतर व्यावसायिक तनाव, सूचना की अधिकता और सामाजिक अलगाव ने चिंता, मानसिक थकान, भावनात्मक अस्थिरता और बर्नआउट में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

यह शोध-पत्र नाद-न्यूरो चेतना विज्ञान (Nada-Neuro Consciousness Science-NNCS) को एक अंतर्विषयक वैचारिक शोध-ढाँचे के रूप में प्रस्तावित करता है। यह तंत्रिका-विज्ञान (Neuroscience), संगीत मनोविज्ञान (Music Psychology), संज्ञानात्मक विज्ञान (Cognitive Science), ध्यान एवं चिंतन परंपराओं (Contemplative Traditions), सकारात्मक मनोविज्ञान (Positive Psychology), भारतीय ज्ञान प्रणालियों (Indian Knowledge Systems) तथा ध्वनि-आधारित ध्यानात्मक अभ्यासों को एकीकृत करता है।

Downloads

Published

2026-09-08

How to Cite

तिवारी ड. अ. क. . (2026). नाद से आनंद तक: भारतीय संगीत, पुरस्कार-तंत्रिका-विज्ञान और भारतीय ज्ञान प्रणाली के माध्यम से सुख, समृद्धि और मानव उत्कर्ष का नाद-न्यूरो चेतना मॉडल. Sameeksha Global [ISSN: 2581-401X], 10(1). Retrieved from https://stm.eurekajournals.com/index.php/Sameeksha/article/view/1176

Issue

Section

##section.default.title##