राजस्थान में पांडुलिपि प्राप्ति के महत्वपूर्ण स्थान मंदिर विशेष संदर्भ बधीचंद जी का दिगंबर जैन संप्रदाय मंदिर-जयपुर
Abstract
भारतवर्ष में प्राचीन काल से ही पांडुलिपियों के लेखन और प्रति लेखन का कार्य चला आ रहा है। हमारे पास साधारण रूप में दसवीं शताब्दी से पहले की पांडुलिपियों उपलब्ध नहीं है परंतु इसके बाद के काल से प्राचीन पुस्तकालयों, और उन्हीं की परंपरा को आगे बढ़ते हुए धार्मिक स्थलों यथा मंदिर, शास्त्र भंडारो आदि स्थलों पर हस्तलिखित ग्रंथों को संरक्षित रखने की परंपरा चली आ रही है।
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Published
2024-06-15
How to Cite
पंचारिया म. क. . (2024). राजस्थान में पांडुलिपि प्राप्ति के महत्वपूर्ण स्थान मंदिर विशेष संदर्भ बधीचंद जी का दिगंबर जैन संप्रदाय मंदिर-जयपुर. Sameeksha Global [ISSN: 2581-401X], 8(1). Retrieved from https://stm.eurekajournals.com/index.php/Sameeksha/article/view/774
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