ट्रिपल तलाक कानून का भारतीय मुस्लिम समाज पर प्रभाव: चुनौतियां एवं समाधान

Authors

  • डॉ0 आशा कुमारी

Abstract

लंबे विवाद के बाद भारतीय संसद ने आखिरकार ट्रिपल तलाक बिल मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारो का संरक्षण अधिनियम) 2019 26 जुलाई 2019 को पारित कर दिया। इस बिल के पारित होने से पहले दो बार सरकार को इसके संबंध में अध्यादेश लाना पड़ा था। 22 अगस्त 2017 को भारत की सुप्रीम कोर्ट ने सायरा बानो बनाम यूनियन ऑफ इंडिया[1] के मामले में ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक, अवैध वह शून्य करार दिया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने दो के मुकाबले तीन के बहुमत से ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक, अवैध व शून्य घोषित किया। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद संसद द्वारा इस संबंध में कानून पारित करने हेतु बिल प्रस्तुत किया गया, परंतु यह बिल लोकसभा में पारित होने के बावजूद राज्यसभा में पारित नहीं हो सका। इस कारण सरकार को इस संबंध में अध्यादेश लाना पड़ा। अध्यादेश की अवधि 6 माह की समाप्ति से पूर्व सरकार को दूसरी बार भी इस संबंध में अध्यादेश लाना पड़ा। अंततः संसद के दोनों सदनों में पारित होने के बाद अब यह कानून का रूप ले चुका है तथा हमारे पूरे देश में लागू कर दिया गया है।

 

[1] (2017) 9 SCC–1

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Published

2025-01-30

How to Cite

कुमारी ड. आ. . (2025). ट्रिपल तलाक कानून का भारतीय मुस्लिम समाज पर प्रभाव: चुनौतियां एवं समाधान. Sameeksha Global [ISSN: 2581-401X], 9(1 (Jan-Jun). Retrieved from https://stm.eurekajournals.com/index.php/Sameeksha/article/view/940