सामाजिक परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा की प्रासंगिकता

Authors

  • वीरेन्द्र कुमार शर्मा

Abstract

वर्तमान समय में प्राय सभी मनुष्य सामाजिक परिवर्तन में शिक्षा की विशेष महत्ता की चर्चा करते है। सभी व्यक्तियों की यह धारणा है कि शिक्षा वह शक्तिशाली और स्थायी महत्व का कारक या अभियन्त्र है, जिससे समाज में सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन लाया जा सकता है, इसलिए वे शिक्षा प्रदान करने पर बहुत अधिक बल देते है। परिवर्तन संसार का निश्चित नियम है। संसार में सभी भौतिकपदार्थों एवं प्राकृतिक रचनाओ में परिवर्तन होता है। मानव-शरीर की अभिवृत्तियों, रचनाओं, क्षमताओं सभी में परिवर्तन होता है सार यह है कि परिवर्तन सार्वभौमिक एवं सार्वकालिक है। शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन का घनिष्ठ सम्बन्ध है। कभी सामाजिक परिवर्तन के कारण शिक्षा प्रभावित होती है, और कभी स्वयं शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन लाने का कारण बनती है। सामाजिक परिवर्तन के अन्य साधनों के प्रतिव्यक्ति कठोर हो सकता है। उसमें बदले की भावना जागृत हो सकती है। किन्तु शिक्षा व्यक्ति में विवेक एवं तर्क पैदा करती है, आत्मनियन्त्रण उत्पन्न करती है, जिस से वह स्वयं ही उचित-अनुचित को ध्यान में रखकर सामाजिक परिवर्तन को स्वीकार कर लेता है। वर्तमान युग की आवश्यकताओं का अनुभूत करते हुए, मैं ने सामाजिक परिवर्तन के परिपे्रक्ष्य में शिक्षा की प्रासंगिकता को अपने शोधालेख का विषय बनाते हुए शिक्षा को समसामयिक दृष्टि से प्रस्तुत किया है।

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Published

2025-01-30

How to Cite

शर्मा व. क. (2025). सामाजिक परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा की प्रासंगिकता. Sameeksha Global [ISSN: 2581-401X], 9(1 (Jan-Jun). Retrieved from https://stm.eurekajournals.com/index.php/Sameeksha/article/view/951