सार्वभौमिक जीवन दर्शन: श्रीमद्भगवद्गीता दर्शन
Abstract
श्रीमद्भगवद्गीता आचरण, व्यवहार व जीवन पद्धति की निर्देशिका है। इसके माध्यम से सांसारिक प्राणियों की विभिन्न प्रकृति व उसके अनुरूप विभिन्न क्रियाओं-सात्विक,राजसी व तामसी का वर्णन किया गया है। सांसारिक माया मोह के बन्धनों से मुक्ति हेतु ज्ञानयोग, भक्तियोग व कर्मयोग का मार्ग दिखाया गया है।ज्ञान दो प्रकार का होता है-परा (आघ्यात्मिक) व अपरा (लौकिक)। मनुष्य जिस लौकिक ज्ञान को प्राप्त कर स्वयं को श्रेष्ठ समझता है वह ज्ञान जीवन की विषम परिस्थितयों के समाधान में सहायक नहीं होता। परा ज्ञान के अभाव में ही अर्जुन युद्धस्थल में स्वयं को विषम स्थिति में पाते हैं। सांसारिक व्यक्ति के रूप में अर्जुन के जीवन में आने वाले संशय का निवारण करने हेतु श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हैं जिसके पश्चात अर्जुन मोह की स्थिति से उबरकर युद्ध के लिए तत्पर हो जाते हैं।