राजकीय एवं निजी उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यो की नेतृत्व शैली का तुलनात्मक अध्ययन

Authors

  • योगेश मिश्रा सहायक प्रोफेसर, सेठ श्री सूरजमल तापडिया आचार्य संस्कृत महाविघालय, जसवन्तगढ, नागौर।

Abstract

नेतृत्व एक प्रकार का प्रबन्धन है। जिसमें संगठनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति सर्वोपरि होता है। नेतृत्व दूसरों को अनुसरण करने के लिए प्रभावित करने की क्षमता होती है। अतः लोगों को अपने निर्देशानुसार चलाने की क्षमता ही नेतृत्वशीलता होती है।

नेतृत्व की प्रभावशीलता बहुत हद तक नेतृत्व की शैली पर निर्भर करती है। नेतृत्व के ढ़ंग को नेतृत्व शैली कहा जाता है। अर्थात् ‘‘नेतृत्व करने का कौशल” नेतृत्व शैली कहलाता है।

नेतृत्व शैली विशेष प्रकार की व्यवहार कुशलता है जो समूह के प्रत्येक सदस्य को लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर करती है। नेतृत्व की शैली से तात्पर्य प्रधानाचार्य द्वारा शिक्षा देने, योजनाओं को लागू करने तथा लोगों को प्रोत्साहित करने की क्षमता से है। नेतृत्व व्यवहार को ही नेतृत्व शैली कहा जाता है।

नेतृत्व शैली एक प्रधानाचार्य की दिशा-निर्देश प्रदान करने, योजनाओं के क्रियान्वयन एवं अधीनस्थों को प्रेरित करने के तरीके को प्रदर्शित करती है। नेतृत्व शैली में प्रधानाचार्य का व्यक्तित्व, व्यवहार, मार्गदर्शन, आत्मविश्वास, सजगता एवं सम्प्रेषण तकनीक आदि सम्मिलित होते हैं।

प्रधानाचार्यो द्वारा किए जाने वाले कार्यो एवं व्यवहारों को सम्मिलित रूप से नेतृत्व शैली कहा जाता है। प्रधानाचार्य की नेतृत्व शैली एवं प्रशासकीय क्षमता पर ही विद्यालय की प्रगति निर्भर करती है।

सामान्यतः नेतृत्व शैली संगठन लक्ष्यों की सफलतापूर्वक प्राप्ति हेतु प्रधानाचार्य द्वारा अपनाया जाने वाला मार्ग है। विद्यालय में परिस्थितियों के अनुसार प्रधानाचार्य अपनी सूझ-बूझ के साथ उपयुक्त नेतृत्व शैली का चयन करता है।

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Published

2023-01-15

How to Cite

मिश्रा य. . (2023). राजकीय एवं निजी उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यो की नेतृत्व शैली का तुलनात्मक अध्ययन. Sameeksha Global [ISSN: 2581-401X], 7(1 (Jan-Jun). Retrieved from https://stm.eurekajournals.com/index.php/Sameeksha/article/view/976