सागरिका संस्कृत पत्रिका में प्रकाशित संज्ञा सम्बन्धी लेखों का अनुशीलन

Authors

  • डाॅ. रामबाबू सहायक आचार्य-संस्कृत, महारानी श्री जया राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भरतपुर (राज.)

Abstract

भारतीय संस्कृति के अनुरागी महामनीषी डॉ. हरिसिंह गौर ने सागर विश्वविद्यालय की स्थापना कर संस्कृतसम्बर्द्धन रूपी यज्ञ में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन शाश्वत प्रयासों को सतत् रखते हुए भारतीयता के साकार विग्रह डॉ. रामजी उपाध्याय ने सन् 1962 में सागर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग से ‘सागरिका‘ त्रैमासिक पत्रिका का शुभारम्भ किया। प्रथम वर्ष में यह पत्रिका षाण्मासिकरूपेण प्रकाशित हुई। इसलिए प्रथम वर्ष में केवल दो ही अंक प्रकाशित हुए। सन् 1963 से उपाध्याय जी महोदय द्वारा स्थापित ‘सागरिका समिति से त्रैमासिक रूप में छपने लगी। इसके पश्चात उपाध्याय जी द्वारा स्थापित ‘संस्कृत परिषद्’ द्वारा इसका प्रकाशन होने लगा। सागर विश्वविद्यालयीय यह परिषद् संस्कृत-भारती की चिरजीवन्तता को बनाये रखने के लिए पत्रिका प्रकाशन के साथ विश्वविद्यालय में ‘नियमित संस्कृत गोष्ठियों का भी आयोजन करती है।

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Published

2023-01-15

How to Cite

रामबाबू ड. . (2023). सागरिका संस्कृत पत्रिका में प्रकाशित संज्ञा सम्बन्धी लेखों का अनुशीलन. Sameeksha Global [ISSN: 2581-401X], 7(1 (Jan-Jun). Retrieved from https://stm.eurekajournals.com/index.php/Sameeksha/article/view/977