https://stm.eurekajournals.com/index.php/anveshan/issue/feed The Anveshan: A Multidisciplinary Journal in Hindi [ISSN: 2581-4044 (online)] 2026-08-08T07:48:33+00:00 Eureka Journals info@eurekajournals.com Open Journal Systems <p>The Anveshan: A Multidisciplinary Journal in Hindi, is a <strong><em>National peer-reviewed journal,</em></strong> which aim is to provide a high profile, open access, leading-edge forum for authors and academic researchers working in the fields of science, technology, management, arts, medical, pharmacy and engineering to contribute, and to disseminate innovative and important new work in Hindi/Hinglish language. This journal specially aims to provide a platform to the authors who prefer publishing their articles in languages other than English (Hindi/Hinglish). The journal focuses on a fast peer review process of submitted papers to ensure accuracy, the relevance of articles and originality of papers.</p> <p>This is the new weblink of the journal. 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शोध-पत्र प्रतिपादित करता है कि भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) को केवल सांस्कृतिक विरासत अथवा प्राचीन ज्ञान के संग्रह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे शैक्षिक नियोजन, संस्थागत नेतृत्व, शैक्षिक शासन, पाठ्यचर्या नवाचार, शिक्षक शिक्षा, अनुसंधान, गुणवत्ता आश्वासन तथा ज्ञान-आधारित नीति-निर्माण की एक समग्र रणनीतिक रूपरेखा के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।</li> <li>इस अध्ययन में राष्ट्रीय शैक्षिक नियोजन एवं प्रशासन संस्थान (NIEPA) के संदर्भ में एक मौलिक "भारतीय ज्ञान प्रणाली आधारित शैक्षिक नियोजन एवं संस्थागत रूपांतरण मॉडल" प्रस्तुत किया गया है। यह मॉडल शैक्षिक नियोजन, संस्थागत शासन, अनुसंधान उत्कृष्टता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन, शिक्षक क्षमता विकास तथा सतत नेतृत्व को एकीकृत करते हुए उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक व्यावहारिक रणनीतिक ढाँचा प्रस्तुत करता है।</li> <li>यह शोध-पत्र राष्ट्रीय, राज्य, विश्वविद्यालय तथा संस्थागत स्तर पर कार्यान्वयन की चरणबद्ध रणनीति प्रस्तुत करते हुए यह निष्कर्ष देता है कि भारतीय ज्ञान प्रणाली का व्यवस्थित समावेशन भारतीय उच्च शिक्षा को अधिक नवाचारी, प्रतिस्पर्धी, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध तथा वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली बना सकता है। यह रूपरेखा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण शैक्षिक मॉडल प्रस्तुत करती है।</li> </ul> 2026-02-21T00:00:00+00:00 Copyright (c) 2026 The Anveshan: A Multidisciplinary Journal in Hindi [ISSN: 2581-4044 (online)] https://stm.eurekajournals.com/index.php/anveshan/article/view/1122 प्रखर बुद्धि, रणनीतिक मौन और भावनात्मक आत्म-नियंत्रण छल, ईर्ष्या एवं षड्यंत्र का सामना करने के लिए एक मनोवैज्ञानिक प्रतिरोध-प्रतिमान 2026-08-01T05:29:36+00:00 डॉ. अजय कृष्ण तिवारी swati@eurekajournals.com <p>आधुनिक जीवन में संघर्ष का स्वरूप प्रत्यक्ष आक्रमण से आगे बढ़कर मनोवैज्ञानिक दबाव, भ्रामक सूचना, प्रतिष्ठा-हानि, भावनात्मक उकसावे, संस्थागत राजनीति, डिजिटल दुष्प्रचार तथा छिपे हुए षड्यंत्रों तक विस्तृत हो चुका है। ऐसी परिस्थितियों में केवल शक्ति, आक्रोश अथवा त्वरित प्रतिकार व्यक्ति की रक्षा नहीं कर सकते। इसके विपरीत, आवेगपूर्ण प्रतिक्रिया कभी-कभी विरोधी पक्ष की रणनीति को ही सफल बना देती है। वर्तमान वैचारिक शोध-पत्र का उद्देश्य यह प्रतिपादित करना है कि छलपूर्ण एवं षड्यंत्रकारी व्यवहार का प्रभावी सामना करने के लिए प्रखर बुद्धि, रणनीतिक मौन, भावनात्मक आत्म-नियंत्रण, मनोयोग, धैर्य, साक्ष्य-संग्रह और नैतिक निर्णय-क्षमता का समन्वित विकास आवश्यक है।</p> <p>इस शोध-पत्र में “प्रबुद्ध मनोवैज्ञानिक प्रतिरोध-प्रतिमान”-Enlightened Psychological Resistance Model (EPRM)-प्रस्तावित किया गया है। यह प्रतिमान संघर्ष की प्रक्रिया को आठ चरणों में समझाता है: उकसावे की पहचान, चेतन विराम, भावनात्मक स्थिरीकरण, रणनीतिक मौन, सूक्ष्म अवलोकन, साक्ष्य-संग्रह, विवेकपूर्ण प्रत्युत्तर और नैतिक समाधान। अध्ययन का मूल तर्क यह है कि वास्तविक विजय किसी व्यक्ति के विनाश, भयादोहन या अपमान में नहीं, बल्कि उसके छल को निष्प्रभावी करने, सत्य की रक्षा करने, स्वयं की गरिमा बनाए रखने और न्यायपूर्ण समाधान प्राप्त करने में निहित है। शोध-पत्र रणनीतिक मौन और दमनकारी चुप्पी के बीच भी स्पष्ट अंतर स्थापित करता है तथा यह बताता है कि मौन तभी उपयोगी है, जब वह भय या पलायन नहीं, बल्कि जागरूक तैयारी, विवेकपूर्ण संयम और उचित समय पर सत्यपूर्ण अभिव्यक्ति का माध्यम हो।</p> 2026-08-01T00:00:00+00:00 Copyright (c) 2026 The Anveshan: A Multidisciplinary Journal in Hindi [ISSN: 2581-4044 (online)] https://stm.eurekajournals.com/index.php/anveshan/article/view/1137 लक्ष्मी दर्शन एवं जीवन उत्कर्ष: भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में समृद्धि, मानसिक शांति, नेतृत्व, नैतिकता एवं मानव विकास का बहुआयामी विश्लेषण 2026-08-08T07:48:33+00:00 डॉ. अजय कृष्ण तिवारी swati@eurekajournals.com <p>भारतीय ज्ञान परंपरा में "लक्ष्मी" केवल धन या भौतिक ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री नहीं हैं, बल्कि वे ज्ञान, सदाचार, मानसिक संतुलन, सामाजिक समृद्धि, नैतिक नेतृत्व और आध्यात्मिक उन्नति की प्रतीक मानी गई हैं। प्रस्तुत शोध-लेख का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित लक्ष्मी-दर्शन का समग्र विश्लेषण करना तथा यह स्पष्ट करना है कि वास्तविक समृद्धि का आधार केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि सकारात्मक चिंतन, अनुशासन, आत्मसंयम, नैतिक जीवन, सेवा और आध्यात्मिक चेतना है।</p> <p>यह अध्ययन भारतीय ज्ञान परंपरा, दार्शनिक विचारों तथा आपके द्वारा उपलब्ध कराई गई जैन साधना-संबंधी सामग्री के आधार पर यह प्रतिपादित करता है कि समृद्धि का सर्वोच्च स्वरूप व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के समन्वित विकास में निहित है। जैन परंपरा में वर्णित मंत्रों और साधना-विधियों को उनके परंपरागत आध्यात्मिक संदर्भ में प्रस्तुत करते हुए उनके मनोवैज्ञानिक एवं जीवन-प्रबंधन संबंधी आयामों पर भी विचार किया गया है।</p> 2026-08-08T00:00:00+00:00 Copyright (c) 2026 The Anveshan: A Multidisciplinary Journal in Hindi [ISSN: 2581-4044 (online)]